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EMI कैलकुलेटर

लोन की रकम, ब्याज दर और अवधि डालें। हर महीने की EMI, कुल ब्याज और पूरा भुगतान शेड्यूल यहीं दिखेगा।

अपडेट: 28 अक्टूबर 2026मुफ़्त · आपका डेटा कहीं नहीं भेजा जाताRead in English
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% सालाना
साल
प्रीपेमेंट (ज़रूरी नहीं)
EMI के ऊपर
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EMI कैसे निकलती है

EMI यानी हर महीने की बराबर किस्त, जिसमें ब्याज और मूलधन दोनों शामिल होते हैं। सभी बैंक यही फ़ॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं:

EMI = P × r × (1 + r)n ÷ ((1 + r)n − 1)

यहाँ P लोन की रकम है, r मासिक ब्याज दर (सालाना दर ÷ 12 ÷ 100) और n कुल किस्तों की संख्या।

उदाहरण

₹10 लाख का लोन, 10.5% ब्याज, 5 साल: EMI होगी ₹21,494। 60 महीनों में आप कुल ₹12,89,634 चुकाएँगे, यानी ₹2,89,634 ब्याज।

EMI कम कैसे करें

  • ज़्यादा डाउन पेमेंट: जितना कम उधार, उतनी कम EMI।
  • लंबी अवधि: EMI घटती है, लेकिन कुल ब्याज लाखों में बढ़ जाता है।
  • शुरुआती सालों में प्रीपेमेंट: शुरू में ब्याज सबसे ज़्यादा होता है, इसलिए तब का प्रीपेमेंट सबसे ज़्यादा बचाता है।

फ़्लोटिंग रेट वाले लोन पर RBI के नियमों के तहत बैंक प्रीपेमेंट या फ़ोरक्लोज़र चार्ज नहीं ले सकते।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रीपेमेंट से EMI घटती है या अवधि?

आम तौर पर बैंक EMI वही रखते हैं और अवधि घटा देते हैं, जिससे सबसे ज़्यादा ब्याज बचता है। चाहें तो बैंक से EMI घटाने को कह सकते हैं।

शुरुआती EMI में ज़्यादातर पैसा ब्याज में क्यों जाता है?

ब्याज बाकी बचे लोन पर लगता है। शुरू में बकाया सबसे ज़्यादा होता है, इसलिए ब्याज का हिस्सा बड़ा होता है। जैसे-जैसे लोन घटता है, EMI का ज़्यादा हिस्सा मूलधन चुकाने में जाता है।